कुछ ऐसा है उसकी मोहब्बत का असर,

नई दिल्ली 'कुछ ऐसा है उसकी मोहब्बत का असर, न जानें क्यों सजदे में सिर झुक जाता है मेरा' जी हां, यह पंक्तियां हिंदुस्तान की गंगा-जमुनी तहजीब पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं, जहां हर दौर में हैवानियत हारती है और इंसानियत जीतती है। यकीं न हो तो चले आइए उत्तर पूर्वी दिल्ली जिले में मौजूद जाफराबाद इलाके में जहां सबसे प्राचीन मंदिर शिव मंदिर के कपाट एक पांच वक्त का नमाजी खोलता है और हिंदू भाई उसके प्रांगण में महाकाल के जयकारे लगाते हैं। 


यहां दिखती है गंगा जमुनी तहजीब की झलक


उत्तर पूर्वी दिल्ली में 24-25 फरवरी को जहां इंसान ही इंसान के खून का प्यासा हुआ था, उसी इलाके के जाफराबाद में गंगा जमुनी तहजीब आज भी बरकरार है। उस दौर में जब लोग एक दूसरे को फूटी आंख नहीं भा रहे। यह तहजीब का ही नतीजा है कि जाफराबाद के सबसे प्राचीन मंदिर शिव मंदिर के कपाट एक पांच वक्त का नमाजी खोलता है और हिंदू भाई उसमें महाकाल के जयकारे लगाते हैं।


नंगा नाय महाराज जी ने की थी मंदिर की स्थापना


यह शिव मंदिर जाफराबाद गली नंबर-32 में स्थित है। मंदिर के पुजारी पंडित रामनाथ ने बताया कि आजादी से पहले के समय का यह शिव मंदिर है, इसकी स्थापना नंगा नाय महाराज जी ने की थी। जाफराबाद मुस्लिम बहुल है, लेकिन कई हिंदुओं की कपड़े की दुकानें यहां पर है। रामनाथ बाबरपुर में रहते हैं।


मंदिर की चाभी रहती है परवेज के पास


 


पंडित रामनाथ का कहना है कि भले ही मंदिर के पुजारी वह हैं, लेकिन इसके कर्ताधर्ता परवेज हैं। मंदिर की चाबी मंदिर के सामने रहने वाले परवेज के पास रहती है। वह ही रोज मंदिर को खोलते हैं और बंद करते हैं।


परवेज के लिए फर्क नहीं मंदिर-मस्जिद में


वहीं, परवेज का कहना है कि वह बचपन से ही इस मंदिर को देखते आ रहे हैं। वह मंदिर और मस्जिद में फर्क नहीं करते। मंदिर के गेट खोलने को लेकर उन्होंने वह खुदा की रजा के लिए यह काम करते हैं, पैगंबर मुहम्मद साहब की शिक्षा है कि कोई नेकी करो तो उसका ढिंढोरा मत पीटो। जाफराबाद का जो रूप लोगों के सामने पेश किया जाता है, वैसा यहां कुछ नहीं है। इन दंगों में जब लोग धार्मिक स्थानों को नुकसान पहुंचा रहे थे, जाफराबाद में हर एक धार्मिक स्थल सुरक्षित रहा। इसके अलावा जाफराबाद में पांच मंदिर और हैं और उन्हें कुछ नहीं हुआ दंगों के दौरान।


मंदिर और मस्जिद साथ साथ


जाफराबाद में एक गली ऐसी है जहां पर शिव मंदिर और मस्जिद बराबर-बराबर में है। इसके बाद भी यहां आज तक कुछ नहीं हुआ। मंदिर की देखेरख करने वाले गोविंद ने बताया कि इन दंगों ने कई इलाकों को बर्बाद कर दिया, लेकिन जाफराबाद के अंदर कुछ नहीं हुआ।


यहां मोहब्बत-इंसानियत जिंदा है अभी


मुस्लिम भाइयों ने खुद मंदिर में आकर कहा कि गोविंद तुम्हें और मंदिर को कुछ नहीं होने देंगे। गोविंद ने कहा कि वह खुद को इस इलाके में सुरक्षित महसूस करते है, जो प्यार यहां के लोगों से मिलता है शायद किसी दूसरे इलाके में उन्हें न मिल पाए।